वकालत के 7 दीपक | Seven Lamps Of Advocacy In Hindi

हम सभी ने कभी न कभी ये वाक्य असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय सुना या कहीं लिखा देखा होगा। इसका अर्थ है है की मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो, मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर ले चलो। जब कोई व्यक्ति किसी वकील के पास अपना कैसे ले कर आता है तो उस व्यक्ति की ये आशा होती है की वकील उनके कैसे को अंधकार से प्रकाश की ओर ले कर जायेगा। और ये वकील का भी कर्तव्य है की वो इस व्यक्ति की हर मुमकिन सहायता करे की उसका केस अंधेरे से प्रकाश की और आ सके। किसी केस को असत्य से सत्य की ओर ले जाने और अंधकार से प्रकाश में लाने के लिए एक वकील को भी वकालत के seven lamps of advocacy के बारे पता होना चाहिए।

Seven lamps of advocacy एक पेशेवर नैतिकता का बहुत ही दिलचस्प टॉपिक है। act 1961 के तहत एक वकील के जो अधिकार है वो भी इन Seven lamps of advocacy का उपयोग करने में मदद करता है।

History of seven lamps of advocacy 

अगर कोई वकील सक्सेफुल होना चाहता है या जो सक्सेसफुल है उनको एक घोड़े को तरह काम करना चाहिए मतलब सब कुछ फास्ट तरीके से करना , ओर एक वकील को एक साधु की तरह रहना चाहिए। एक अच्छे वकील के कुछ गुण होते है जिन्हे न्यायधीश एडवर्ड पेरी थे जिन्होंने अपनी बुक seven lamps of advocacy में लिखा। ये वो गुण है जिन में एक वकील को महारत हासिल करनी होती है। अगर किसी वकील के पास ये गुण है तो वो डेफिनेटली एक सक्सेसफुल वकील होगा। इसके बाद न्यायमूर्ति “वि कृष्णा स्वामी अय्यर” जी ने अपनी पुस्तक “पrofessional conduct of advocacy” में आठवें लैंप को जोड़ा जिस को उन्होंने Tact का नाम दिया। चलिए तो डिटेल में Seven lamps of advocacy के बारे में जानते है।

Seven lamps of advocacy

  1. ईमानदारी | Honesty
  2. साहस | Courage
  3. क्षेत्र | Industry
  4. बुद्धि | Wit
  5. वाग्मिता | Eloquence
  6. फैसला | Judgement
  7. अध्येतावृति | Fellowship

ये वो सात गुण है जो एक वकील को कानूनी पेशे में सफल होने के लिए इन गुणों का पालन करना ही चाहिए। 

ईमानदारी | Honesty

ईमानदारी सबसे अच्छी नीति ये सब ने सुना ही है, एक वकील को हमेशा ईमानदार होना चाहिए। किसी भी वायक्ति के विचार, व्यवहार में ईमानदारी जलकनी चाहिए। ईमानदारी से व्यक्ति की प्रतिष्ठा बढ़ती है। और एक वकील के लिए उसकी प्रतिष्ठा बहुत मान्य रखती है। प्रतिष्ठा से ही आदमी का नाम बनता है और यही नाम एक वकील तो प्रसिद्ध वकील बनाती है। आज के समय में सभी का नाम ही चलता है और ये नाम प्रतिष्ठा से बनता है और प्रतिष्ठा ईमानदारी से बनती है। 

वैसे तो हमेशा से वकीलों को लताड़ लगाने के लिए कहते है की वकील झूठे होते है। पर ये हमेशा नहीं होता की जो एक आम आदमी को झूठ लगे वो सच में भी झूठ हो। एक वकील को ईमानदार माना जाता है क्योंकि उसे उसके क्लाइंट के हित के लिए कार्य करना पड़ता है। मुख रूप से एक वकील को न्याय और सत्य की साइड में रहना चाहिए न की धोखा देने में माहिर। 

एक वकील को अपने क्लाइंट के प्रति ईमानदार होना चाहिए मतल्व वकील को केस के बारे में सब कुछ अपने क्लाइंट को बताना चाहिए जिस से की क्लाइंट को आगे चल कर कोई नुकसान न हो। एक वकील को अपने विपक्ष के प्रति भी ईमानदार होना चाहिए किसी भी मोड़ पर अपने प्रतिद्वंदी को विपरीत दिशा में ले जाने के लिए कोई गलत तथ्य नहीं देना चाहिए।

एक वकील को हमें न्याय का साथ देना चाहिए क्योंकि जो भी व्यक्ति कोर्ट में आता है इसका मकसद न्याय लेना होता है। वकील को जज के सामने हमेशा सच्चा तथ्य पेश करना चाहिए। 

साहस | Courage

ये एक ऐसी गुन है जो किसी भी व्यक्ति में होना बहुत ही जरूरी है। ये एक ऐसी क्वालिटी है जो किसी खतरे या परेशानी में डर को कंट्रोल करने में सहायता करती है। और ये क्वालिटी एक अच्छे वकील के पास होना बहुत ही जरूरी है की जिस से वो बाहर से आने वाले प्रेशर की आसानी से हैंडल कर सके। एक वकील को बहुत सी विकट परिस्थितियों में केस लड़ना पड़ता है जिस से उन पर बहुत से पॉलिटिकल प्रेशर होते अगर वकील में साहस होगा तो वो आसानी से किसी को भी न्याय दिला सकता है। साहस का मतलव ही डर के आगे बिना किसी भय के खड़े रहना। अगर आपको अपनी बात पर जज को सहमत करना है तो आपको अपनी बात बिना डरे पूरे गर्व से कहानी पड़ेगी। क्यूंकि अगर असली मायने में देखा जाए तो advocacy एक युद्ध है जिसमे जितना ज्यादा साहस होगा वो उतना अच्छा लगेगा। ये साहस भी किसी में पहले से नहीं होता ये भी धीरे धीरे बनता है। साहस को बना ने के लिए एक वकील को अपने प्रोफेशन में महारत हासिल करनी होती है। जैसे जैसे उसका एक्सपीरियंस बढ़ता जायेगा साहस खुद ब खुद बढ़ता जायेगा। 

क्षेत्र | Industry

किसी भी फील्ड में सक्सेसफुल होने से लिए हमे उस फील्ड की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। यही बात एडवोकेसी पर लागू होती है। ऐसे देखा जाए तो कानूनी ज्ञान एक महासागर के जैसा है जिस प्रकार महासागर का कोई स्वामी नहीं है उसी प्रकार कानून का भी कोई स्वामी नहीं हो सकता। इस इंडस्ट्री में एक वकील को बहुत ज्यादा हार्ड वर्क करना पड़ता है क्योंकि हर समय कोई न कोई नया कानून आता ही रहता है। जब कोई वकील किसी केस को लेता है तो वकील को केस के रिलेटेड बिलकुल गहराई से स्टडी करनी होती है। इस केस को निपटाने के लिए उन्हें अच्छे से कानून को समझने के लिए पर्याप्त समय देना पड़ता है। 

हमारे भारत का कानून स्थिर नहीं है ये नई समस्या के साथ बदलता रहता है जिस से वकील को खुद नए कानूनों के साथ अपडेट रहना पड़ता है। भले ही कोई वकील पहले से काफी अच्छा वकील हो पर अगर वो नए कानूनों के साथ अपडेट न हो तो उसको भी केस निपटाने में समस्या आ जाती है। एक लिए इस प्रोफेशन में इंडस्ट्री को पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है।

बुद्धि | Wit

एक अच्छे वकील के पास ये क्वालिटी होना बहुत ही जरूरी है एक वकील में बुद्धि और अच्छे सेंस ऑफ ह्यूमर का होना बहुत ही जरूरी है। Wit का अर्थ ही अपने विचारों को बहुत ही चतुराई के साथ जज के सामने पेश करना की जिस से वो आपकी बात से सहमत हो जाए। ये एक बहुत ही जरूरी Seven lamps of advocacy  है जिस से वकालत के अंधेरे को दूर किया जाता है। बुद्धि ही एक वकील को फोकस करने और खुद को तनाव से दूर करने में मदद करती है। जिस के कारण ही एक वकील अपने दिमाग की सीमा से आगे सोच सकता है। 

जब जज के सामने एक वकील को अपनी बात पेश करनी होती है तो वकील को जज के सवालों के जवाब देने होते। एक सवालों के जवाब उसे अपने बुद्धि से एकदम से देने होते है। इसी क्वालिटी के कारण एक वकील अदालत में अच्छे से आर्गुमेंट कर पता है। वकील को अपनी बुद्धि के साथ  ही जज को अपनी बात पर सहमत करता है।

वाग्मिता | Eloquence

इसका मतलब है की एक वकील किस  सुर, किस फोर्स और फ्लूंसी के साथ आप  भाषा का उपयोग कर रहे है। एक स्ट्रॉन्ग वोकेबुलरी एक वकील का सबसे बड़ा हथियार होता है तो इस लिए अपना अच्छा इंप्रेशन बना ने के लिए वकील की वोकेबलरी अच्छी होनी चाहिए। क्यूंकि वकील के शब्द ही सारी जजमेंट को निर्धारित करते है। एक अच्छे वकील को बोलने की कला में माहिर होना चाहिए। अगर एक वकील को कानून का अच्छा ज्ञान है पर इसे बोलने की कला अच्छे से नही आती तो फैसला इसके विपरित भी जा सकता है। एक वकील को पता होना चाहिए उसे कब क्या बोलना है केस बोलना है और कहां पर बोलने से रुकना है। एक अच्छा वकील वक्ता ही अपने क्लाइंट और जज पर अच्छा प्रभाव डालता है।

वाक्पटुता के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

  1. वकील एक अच्छा वक्ता होना चाहिए
  2. जज के सामने हमेशा कॉन्फिडेंट रहना चाहिए।
  3. वकील को हमेशा बिना रुके अपने विचार बताने चाहिए।
  4. बोलते समय भाषा में कोई गलती नहीं होनी चाहिए।
  5. सही समय पर बोलने से रुकना आना चाहिए।
  6. भाषण प्रभावशाली होना चाहिए मतलब नाटकीय नही होना चाहिए
  7. एसी भाषा का प्रयोग करें की जिस से निर्णय लिखते समय मदद मिले।

फैसला | Judgement

यह दीपक सभी Seven lamps of advocacy में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इस का अर्थ है की केस के दोनो पक्षों के बारे में अच्छे से छानबीन करना ओर केस के परिणामों के बारे में समझना जिस से केस के गुण दोषों को परख कर केस के निर्णय का पहले से अनुमान लगाना। एक अच्छा वकील पहले से जानता है की गवाह के गवाही देने से फल की जान लेता है की उसका क्या परिणाम होगा। वकील को इस बात का पता होना चाहिए की विपक्ष क्या सवाल पूछेगा और उन सवालों के जवाब उसके पास पहले से ही होने चाहिए। 

एक अच्छे वकील को पहले ही सम्बावित विवादों को उचित अनुमान लगा कर सही मोड़ देख कर केस को अच्छे से निपटना। वकील को हमेशा अपने क्लाइंट को केस के बारे में सब कुछ बताना पड़ता है। लास्ट निर्णय के समय जो विकल्प वालिक को सही लगे उस को चुनने में माहिर होना चाहिए।

अध्येतावृति | Fellowship

ये भी एक बहुत महत्वपूर्ण लैंप है। इस का आसन सा मतलब है की एक वकील को दूसरे वकीलों के साथ भी मेलजोल से रहना चाहिए। जब एक केस कोर्ट में आता है तब दो वकील आमने सामने होते है। और दोनो में बहुत से तर्क वितर्क होते है। उन सारे तर्कों को कोर्ट रूम में ही छोड़ देना और बाहर एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए।  कोर्ट में बहस करते समय भी उनको एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए क्योंकि लड़ाई उन दोनो के भी नहीं बल्कि लड़ाई न्याय के लिए है।

केस बाद जब एक वकील केस हार जाता है तो जीतने वाले वकील से कोई ईर्षा नही करनी चाहिए। अगर कोई वकील ऐसे ही लड़ना शुरू कर दे तो वो अन्य सभी वकीलों के साथ भी दुश्मनी कर लेगा। किसी दूसरे वकील का जिक्र करते समय अच्छे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। वकील को हमें न्यायधीश सम्मान करना चाहिए चाहे उन्होंने फेसला आपके विरुद्ध दिया हो। वकील को हमेशा न्यायधीश को संबोधित करते हुए अच्छे शब्द बोलने चाहिए जैसे की माय लॉर्ड, विद्वान न्यायधीश, महामहिम इन शब्दों से आपके संबध न्यायधीश के साथ अच्छे होंगे।

8th lamp of advocacy

Tact वकालत का 8वां लैंप है।उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश v krishnaswami iyer जी ने अपनी Professional conduct  and advocacy में tact को 8वें लैंप के रूप में लिखा है। अक्सर कोर्ट रूम में भरी मतभेद होने के कारण जोरदार बहस हो जाती है जिस से अदालत कक्ष में बहुत अव्यवस्था हो जाती। उस समय वकील को पता होना चाहिए की ऐसी विकट सथिति से केस निपटना होता है। 

एक वकील ऐसी स्थितियों में इन के लिए माहिर होना चाहिए।

  1. अपने क्लाइंट को नियंत्रित करना
  2. मुकदमे में सामने वाले वकील को नियंत्रित करना।
  3. जज को मनाना।

वकील को एक बेहतर तकनीक का प्रयोग करना आना चाहिए ऐसी विकट परिस्थितियों में।

Conclustion

वकीलों को हमेशा ये Seven lamps of advocacy को फ़ॉलो करना चाहिए। वकालत एक ऐसा पेशा है जो लोगों को न्याय दिलाने में मदद करता है। इस पेशे को केवल पैसा कमाने जरिया नहीं समझना चाहिए। एक वकील को कभी भी किसी का गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए। क्यूंकि जो भी आदमी अदालत का दरवाजा खटखटाता है उसके लिए और सब न्याय के दरवाजे बंद हो गए होते है। हमेशा से एक वकील से ये अपेक्षा की जाती है वो इन seven lamps of advocacy को ध्यान में रखे और इन्ही का उपयोग कर के केस का फेसला करवाए। 

एक वकील को हमेशा ईमानदार रहना चाहिए अपने सहकर्मियों से अच्छे से पेश आना चाहिए। ईमानदारी ही सबसे अच्छी नीति है इसी से एक वकील बड़ा वकील बनता है। seven lamps of advocacy एक अच्छे वकील के गुण है। अगर आप भी एक वकील है या वकालत करने जा रहे है तो आपको इन seven lamps of advocacy का पालन करना चाहिए।

यह सब वकालत के seven lamps of advocacy in hindi  के बारे में है, हमें उम्मीद है कि आपको लेख पसंद आएगा। यदि आपको इस लेख seven lamps of advocacy in hindi के बारे में कोई संदेह है तो टिप्पणी करें या हमसे संपर्क करें। यदि आप इस बारे में अन्य रोचक लेख पढ़ना चाहते हैं तो हमारी वेबसाइट पर जाएँ।
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संदर्भ legal study material 

 

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